Sant Kabir Das Ji Maharaj Ke Dohe


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1.
कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर ।
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर ।।

अर्थ:  इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं है तो दुश्मनी भी ना हो ।

2.
हिंदू कहें मोहि राम पियारा, फुरकत है रहमाना ।
आपस में दोउ लड़ी लड़ी, मुए मरम न कोउ जाना ।।

 अर्थ:  कबीर कहते हैं कि हिंदू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है । इसी बात पर दोनों लड़ लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को नहीं जान पाया ।

3.
धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय ।।

अर्थ:  कबीर जी कहते हैं कि मन में धीरज रखने से सब कुछ होता है । चाहे कोई मालि किसी पेड़ को सौ घड़ा पानी का डाल दे तब भी पल ऋतु आने पर ही मिलेगा ।

4.
दोष पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त ।
अपने याद न आव‌ई, जिनका आदि न अंत ।।

अर्थ:  यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वे दूसरों के दोष देख कर हंसता है, तब उसे अपने दोष याद नहीं आते जिनका ना आदि है और ना कोई अंत है ।